वर्तमान जनसंख्या के आधार पर पंचायतों का परिसीमन हो तो सीटों की संख्या और ज्यादा बढ़ेगी :- रणधीर
सोनबरसा राज (सहरसा) ! भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी सीपीएम सहरसा जिला सचिव कामरेड रणधीर यादव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि बिहार सरकार द्वारा केबिनेट फैसले के आलोक में त्रिस्तरीय पंचायत का नया परिसीमन वर्ष 2011 ईस्वी की जनसंख्या के आधार पर करना त्रुटिपूर्ण फैसला होगा। चूंकि वर्ष 2011 ईस्वी की जनगणना को हुए 15 बर्ष से अधिक हो गया तब से अब तक जनसंख्या में काफी वृद्धि हुई है। कहने को 36 बर्ष बाद पंचायतों का नया परिसीमन हो रहा है परन्तु सच तो यह है कि 15 बर्ष पूर्व की जनसंख्या पर नया परिसीमन हो रहा है। सरकार अगर ससमय चुनाव कराने में सक्षम नहीं है तो पंचायती राज एक्ट की सुसंगत धारों का उपयोग करते हुए चुनाव को और आगे बढ़ाते हुए मार्च वर्ष 2027 ईस्वी तक सम्पन्न होने वाले जनसंख्या के बाद ही नये तरीके से परिसीमन करवाना चाहिए ताकि वर्ष 2011 ईस्वी के 15 बर्ष बाद का भी सही आंकड़ा सामने होता तो वर्तमान समय तक का परिसीमन त्रूटिरहित व न्यायपूर्ण हो पाता। और पंचायतों में निर्वाचित क्षेत्रों की संख्या भी ज्यादा होती और एससी, एसटी, ओबीसी, महिला, और युवाओं को अधिक संख्या में चुनाव लड़ने और जीतकर आने का मौका मिलता। वर्ष 2011 ईस्वी की जनसंख्या के आधार पर जितनी संख्या पर पंचायतों का गठन/ परिसीमन होगा वर्तमान में उसकी जनसंख्या डेढ़ गुना ज्यादा जरूर होगा। कहने का अर्थ अगर वर्ष 2011 ईस्वी की जनसंख्या के आधार पर किसी पंचायत को सात हजार की जनसंख्या पर गठित किया जाता है तो इस पंचायत की वर्तमान में ही दस हजार से अधिक जनसंख्या होगी। सरकार अगर सुव्यवस्थित ,सुसंगठित और प्रशासनिक दृष्टिकोण से पंचायतों को छोटा कर सशक्त और प्रभावशाली बनाना चहती है तो 15 बर्ष पूर्व की जनसंख्या पर नहीं वर्तमान समय में जनसंख्या के आधार पर पंचायतों का परिसीमन करना चाहिए । ताकि निर्वाचन क्षेत्र की संख्या भी बढ़ सके। नहीं तो फिर पांच से दस बर्ष के वाद ही यह सवाल उठना लाजिमी और स्वाभाविक हो जाएगा कि 25 - 30 बर्ष पहले के जनसंख्या आधार पर पंचायतों का परिसीमन है और जनसंख्या दोगुनी से अधिक हो गई । नयी परिसीमन करवायी जाय तो क्या सरकार बार-बार परिसीमन ही कराती रहेगी। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि आर्थिक स्थिति भी बिहार की शायद सामान्य नहीं दिख रही है।
सम्पादक
Arvind Kumar Singh
📍 सहरसा, बिहार
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