अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ के सहरसा जिला इकाई ने गर्भवती महिला व बच्चा के मौत पर सिविल सर्जन सहरसा से किया जांच की मांग
नूमा क्लिनिक सोनबरसा राज की है मामला
सहरसा अस्पताल में पदस्थापित डाक्टर कुमार विवेकानंद चलाते हैं नूमा क्लिनिक
डाक्टर कुमार विवेकानंद का है नूमा क्लिनिक
सोनबरसा राज में मरीज के मौत होने पर दलाल लोग डाक्टर और परिजनों से तालमेल कर मामला को कर देते हैं रफादफा
समाचार डेस्क ज्ञानमाला नैशनल टीवी📺 न्यूज़ चैनल
सोनबरसा राज (सहरसा) (आससे) । अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ के सहरसा (बिहार) जिला इकाई ने सहरसा अस्पताल में कार्यरत डाक्टर कुमार विवेकानंद पर इलाज के दौरान मरीज और मरीज के परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करने एवं गर्भवती माँ और बच्चे की मौत पर सहरसा जिला सिविल सर्जन सहित मुख्यमंत्री बिहार, गृहमंत्री बिहार, सहरसा जिला आरक्षी अधिक्षक व सहरसा जिला पदाधिकारी को एक आवेदन पत्र देकर जांच की मांग किया है। उक्त डाक्टर कुमार विवेकानंद सहरसा अस्पताल में कार्यरत हैं तथा सोनबरसा राज प्रखण्ड मुख्यालय में नूमा क्लिनिक नामक एक निजी अस्पताल चलाते हैं।
मालुम हो कि अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ के सहरसा जिला इकाई ने सहरसा जिला सिविल सर्जन सहित मुख्य मंत्री बिहार, गृहमंत्री बिहार और जिला आरक्षी अधिक्षक व सहरसा जिला पदाधिकारी को जांच करने तथा उचित कानून कार्रवाई करने से सम्बन्धित अपने आवेदन पत्र में लिखा है कि आवेदक मृतक महिला खुशबू कुमारी के पति अजय कुमार शर्मा का आवेदन पत्र अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ सहरसा को प्राप्त हुआ है। आवेदन पत्र में कुछ विषय जांच के योग्य लगता है। मानवाधिकार संघ सहरसा द्वारा पूछे जाने और जांच के पश्चात् कुछ और अहम सवाल सामने आई है। जिसमें (01) गर्भवती महिला के आपरेशन के बाद बच्चा का सही सलामत होना फिर कुछ समय बाद डाक्टर साहब के द्वारा मरीज के परिजन को बताना यह कि पेशेंट सीरियस है। बच्चदानी काटना परेगा।(02) बच्चादानी काटने के बाद फिर बाहर आकर मरीज के परिजनों को यह कहना कि पेसेंट सीरियस है। सहरसा अस्पताल रेफर करता हूँ। (03) मरीज के कन्नारोहट व हल्ला करने पर डाक्टर साहब का मरीज के परिजनों को पैसा देकर अपनी निजी वाहन से आनन-फानन में सहरसा भिजवाना। (04) परिजनों के अनुसार मरीज की मृत्यु क्लीनिक पर ही हो गया था। जिसे डाक्टर कुमार विवेकानंद जिन्दा बोलकर गाड़ी में डालकर बोले बहस करने में पेसेंट यही मर जाएगी। (05) डाक्टर साहब के पास कुछ दबंग या यह कह लिजीए कि वीआईपी लोग भी हैं। जिनके द्वारा कुछ असमान्य होने पर गरीब असहाय मरीज पर साम-दाम का भी प्रयोग किया जाता है। अतः श्रीमान यह जांच का विषय है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ आपसभी से निवेदन करती है और यह उम्मीद भी करती है कि आपके जांच से मरीज के परिजनों को न्याय और इंसाफ मिल सकता है। फलस्वरूप विनम्र आग्रह है कि उक्त समस्या पर शिघ्र जांच टीम गठित करते हुए जांच कर उचित इंसाफ किया जाए। ताकि पुनः ऐसी घटना नहीं हो सके।
