बिहार में गहराती जा रही है भूमि विवाद का मामला नया जमीन सर्वे (1966-74) ने कर दिया है बिहार को बर्बाद

बिहार में गहराती जा रही है भूमि विवाद का मामला नया जमीन सर्वे (1966-74) ने कर दिया है बिहार को बर्बाद

सोनबरसा राज प्रखण्ड मुख्यालय में स्थित कांग्रेस पार्टी की कार्यालय व जमीनी विवाद भी उक्त सर्वे का है मुख्य भूमिका

दफा 06 और दफा 09 का मान्यता रद्द करने एवं सर्वे कोर्ट बंद होने पर भूमि विवाद में आई है नया मोड़

जमीन की कागज किसी के नाम और सर्वे हो जाती है किसी और आदमी के नाम पर मुख्य भूमि विवाद का है केन्द्र बिंदु

जनता दरबार का भूमि विवाद पर नहीं पड़ा कोई असर, गरीब लोग व्यवहार न्यायालय जाने में नहीं है सक्षम

समाचार डेस्क ज्ञानमाला नैशनल टीवी📺 न्यूज चैनल

सुलहनामा से ही हट सकती है भूमि विवाद की प्रक्रिया लेकिन कांग्रेस पार्टी मानने के लिए नहीं है तैयार- जनता

सोनबरसा राज (सहरसा) (आससे)। बिहार में भूमि विवाद को सुलझाने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की अदालत और कानून की नई नई पद्धति लागू करने के बावजूद भी भूमि विवाद यथावत है। फलस्वरूप जमीन विवाद के कारण नई नई विवाद उत्पन्न हो रही है। ऐसा ही एक मामला सोनबरसा राज प्रखण्ड मुख्यालय स्थित एक जमीन विवाद वर्षों से चली आ रही है। 
कहा जाता है कि सोनबरसा राज प्रखण्ड मुख्यालय स्थित पूर्व में चल रही जिस जमीन पर कांग्रेस पार्टी का कार्यालय चल रही थी , उस जमीन को कांग्रेस पार्टी के प्रखण्ड अध्यक्ष सुरेन्द्र नारायण सिंह का मानना है कि यह जमीन कांग्रेस पार्टी की है। फलस्वरूप उक्त विवाद वर्षों से चली आ रही है जो एक अनसुलझे रहस्य बन गयी है। उक्त विवाद को लेकर जहाँ एक ओर सरकारी महकमा परेशान हैं वहीं जनता में भी भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। वैसे जनता की मानें तो सभी का कहना है कि उक्त विवाद बिना सुलहनामा का सुलझने वाला नहीं है। 
आपको बताते चलें की जहाँ एक ओर कांग्रेस पार्टी का कहना है कि उक्त जमीन कांग्रेस पार्टी की है। जबकि दूसरे पक्ष के लोग अवधेश सिंह, दिनेश सिंह, गोपाल सिंह और भुपेन्द्र सिंह  का कहना है कि भूमि विवाद जबरन एक पार्टी की हैसियत से लोग कर रहे हैं जबकि उक्त जमीन मुझे दिनांक 10/01/1944 ईस्वी में ही बन्दोबस्ती से प्राप्त है और उक्त जमीन पर मेरा घर द्वारा एवं दखल कबज है। 
मालूम हो कि भूमि विवाद वाद संख्या- 50/23-24 प्रमोद कुमार सिंह आवेदक बनाम अवधेश सिंह, दिनेश सिंह, गोपाल सिंह और भुपेन्द्र सिंह के सम्बन्ध में कहा जाता है कि आवेदक प्रमोद कुमार सिंह द्वारा गलत वयान से प्रस्तुत मुकदमा दाखिल किया गया है। पूर्व में विवादी जमीन के निश्वत कांग्रेस सेवा सदन सोनबरसा राज द्वारा प्रखण्ड कांग्रेस अध्यक्ष सुरेन्द्र नारायण सिंह ने भी भूमि विवाद वाद संख्या - 25/13 दायर किये थे, जिससे उभय पक्ष की सुनवाई पश्चात् दिनांक- 25/05/15 को आदेश पारित किया गया था उसमें निर्गत आदेश में स्पष्ट है कि आवेदक के द्वारा मांगे गए अनुतोष भूमि विवाद निराकरण अधिनियम के अन्तर्गत नहीं आने के कारण वाद पत्र को अस्वीकृत किया जाता है। आवेदक चाहे तो सक्षम व्यवहार न्यायालय में वाद दायर कर अनुतोष प्राप कर सकते हैं। 
वहीं न्यायालय भूमि सुधार उपसमाहर्ता सदर सहरसा द्वारा भूमि विवाद वाद संख्या- 25/13 में पारित आदेश दिनांक- 25/5/15 के विरुद्ध न्यायालय आयुक्त कोशी प्रमण्डल सहरसा में भूमि विवाद अपील वाद संख्या - 1721 दायर किया गया, जिसमें भी दिनांक - 05/12/2019 को आदेश पारित किया गया और आदेश में कहा गया है कि प्रस्तुत अपील वाद को इस न्यायालय में पोषणीय नहीं पाते हुए वाद की कार्यवाही बन्द की गई तथा निम्न न्यायालय को निर्देश दिया गया कि उक्त मामले में पूर्व से पारित आदेश के क्रियान्वयन को तत्काल स्थगित रखें पक्षकार इसके विचारण हेतु सक्षम व्यवहार न्यायालय में जाने के लिए स्वतंत्र है। उसके बाद कार्यवाही स्थगित कर दिया गया। 
सनद रहे कि प्रस्तुत वाद में विवादी जमीन अन्दर मौजा मनोरी, खाता संख्या पुराना 92, खाता नया- 685 , खेसरा पुराना - 238, खेसरा नया - 677 रकवा - 23 डीसमल है। केवाला में चौहद्दी एवं केवाला  बाबु उपेन्द्र नारायण सिंह पिता बाबु भागवत नारायण सिंह, ग्राम सहसौल के नाम से 1946 ईस्वी में निम्न चौहद्दी है- उत्तर में मुनी, दक्षिण में तौफी कामत, पुरब में खन्ता और पश्चिम में ननकेश्वर सिंह है। जबकि जमीन मनोरी मौजा, थाना नम्बर-10 अंचल सोनबरसा राज, खाता पुराना- 186, खेसरा पुराना - 328 रकवा 05 कट्ठा 05 धूर है। इसका चौहद्दी में उत्तर सर हरि बल्लभ उच्च विद्यालय, दक्षिण में नीज, पूरब में सड़क और पश्चिम में नीज भूतपूर्व मालिक जमींदार द्वारा शेष रिटर्न- 1941-42 नाम से विपक्षीगण के पिता राम बहादुर सिंह का दाखिला है तथा दखल कब्जा कर पूर्व से ही मकान निर्माण कर रह रहे हैं। भूमि का बतौर सबूत दिनांक- 10/01/1944 ईस्वी का बन्दोबस्ती परवाना, बतौर शेष रिभेल्युशन रिटर्न- 1941-42 ईस्वी के आधार पर निर्गत है। जिस पर वर्षों से घर मकान बना कर रह रहे हैं। 
वहीं कांग्रेस पार्टी के द्वारा कहा जा रहा है कि मुझे 1946 में उक्त जमीन रजिस्ट्री से प्राप्त है और उसको लेकर विवाद चल रही है। 
ज्ञात हो कि सोनबरसा राज ग्राम पंचायत के लोगों का कहना है कि राम बहादुर सिंह कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद पर थे और वह अपने घर व जमीन पर कांग्रेस पार्टी का कार्यालय चला रहे थे। जब उनका निधन हो गया तो उनके पुत्र अवधेश सिंह कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद का कार्यभार सम्भाल रहे थे और कांग्रेस पार्टी की कार्यालय उनके जमीन व घर में ही चल रही थी। जब वह कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया, उस दिन से कांग्रेस पार्टी की कार्यालय उक्त जमीन व घर से हटा दिया गया है। भ्रम की स्थिति यहाँ से ही शुरू हो गया कि उक्त जमीन कांग्रेस पार्टी की है। जबकि वस्तु स्थिति क्या है वह तो कागज से ही देखा जा सकता है कि वास्तव में यह जमीन कांग्रेस पार्टी की है या स्वर्गीय राम बहादुर सिंह पूर्व कांग्रेस पार्टी के सोनबरसा राज प्रखण्ड अध्यक्ष का है। 
वैसे पूर्व कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष स्वर्गीय राम बहादुर सिंह के सभी चारों पुत्र अवधेश सिंह, दिनेश सिंह, प्रोफेसर गोपाल सिंह और शिक्षक भुपेन्द्र सिंह का कहना है कि मेरा परिवार कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं और हमलोग कांग्रेस पार्टी से अलग नहीं हो सकता हूँ फलस्वरूप यदि कांग्रेस पार्टी को कार्यालय के लिए जमीन चाहिए और कार्यालय चाहिए तो देने के लिए हमसभी तैयार हैं लेकिन एक समझौता के तहत फिर हमसभी जमीन दान में कांग्रेस पार्टी को दे सकता हूँ। यदि कागज से लड़ना है तो कांग्रेस पार्टी सक्षम व्यवहार न्यायालय में मामला दर्ज करे , वहाँ जो निर्णय होगा हमसभी मान लेंगे। लेकिन कांग्रेस पार्टी के नेतागण इसे मानने के लिए तैयार नहीं हैं। मामला यहीं पर फंसा हुआ है। अब देखना है कि आगे क्या होता है। यह तो न्यायालय की मामला है।

वहीं दूसरे पक्ष कांग्रेस पार्टी के नेताओं का कहना है कि मेरा मामला सहरसा व्यवहार न्यायालय के मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी सहरसा में नालसी वाद संख्या 210/2022 चल रही है। जो 17/08/2022 में दर्ज है। इसमें कहा जा रहा है कि परिवादी की ओर से हाजरी दी गई है। परिवादी के विद्वान अधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित हुए। अभिलेख आज आदेशार्थ हेतु निश्चित है। 
प्रस्तुत वाद में परिवादिनी अपने शपथ पूर्वक वयान न्यायालय में दर्ज कराया एवं वयान के समर्थन में कुल तीन साक्षियों का साक्ष्य न्यायालय के समक्ष कराया। 
परिवादी तथा परिवादी द्वारा दिए गए शपथ पूर्वक वयान में कहा कि किराय कामती की जमीन थी जिसे वर्ष 1946 में उपेन्द्र नारायण सिंह ने खरीद कर कांग्रेस कार्यालय के लिए दे दिए। मुदालयगण मिलकर जमीन पर जबरदस्ती कब्जा कर लिए एवं जाली रिटर्न तथा बीटीएक्ट की धारा- 106 का निर्माण दाखिल किया जो निर्णय पारित ही नहीं हुआ। 
जांच साक्ष्य के क्रम में जांच साक्षी संख्या- 01 सत्यनारायण चौपाल, जांच साक्षी संख्या- 02 सुरेन्द्र नारायण सिंह तथा जांच साक्षी संख्या- 03 प्रमोद कुमार सिंह ने परिवादी के साथ हुई घटना का समर्थन किया। 
परिवादिनी के विद्वान अधिवक्ता को सूना अभिलेख का अवलोकन किया। अभिलेख के अवलोकन तथा परिवादी तारणी ऋषिकेश के परिवाद पत्र पर वयान एवं जांच साक्षियों के साक्ष्य एवं परिवाद पत्र पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर परिवाद पत्र में नामित अभियुक्तगण 01. अवधेश कुमार सिंह, 02 दिनेश कुमार सिंह 03 गोपाल कुमार सिंह एवंं 04 भूपेंद्र सिंह के विरुद्ध धारा 147,148,323,427,420,488,471,/34 भादवि के अंतर्गत प्रथम दृश्यता का मामला बनता प्रतित होता है और अभियुक्त के विरुद्ध कार्रवाई का पर्याप्त आधार है। 
परिवादी उपरोक्त आदेशानुसार अभियुक्तगण की उपस्थिति हेतु सम्मान का उपकरण के साथ न्याय शुल्क दाखिल करें। तत्पश्चात् कार्यालय लिपिक अभियुक्तगण की उपस्थिति हेतु सम्मन निर्गत करें। 
वाद दिनांक 28/09/2022 वास्ते सम्मन तलवाना दाखिल करने हेतु। 
सनद रहे कि स्थानीय जनता कहती है कि उक्त मामले से सम्बन्धित जमीन की मामला से कोई तालुकात नहीं है। यह मामला कांग्रेस पार्टी के द्वारा एक सोची समझी साज़िश है। 
प्रेस के द्वारा किसी भी प्रकार की प्रश्न यदि कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष व कार्यकर्ताओं से किया जाता है तो वह मामले को स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाते हैं और कहते हैं कि यह तो वरिष्ठ कांग्रेसी नेता से पूछना चाहिए। फिर बात वहीं बंद हो जाती है।