सोनवर्षा के मज़दूरों की मांग: सम्पूर्ण रोज़गार गारंटी, बेहतर रोजगार गारंटी कानून
सोनबरसा राज (सहरसा) (आससे) । सोनबरसा राज प्रखण्ड के सैंकड़ों मजदूरों ने आज 2 फरवरी को राष्ट्रीय मनरेगा दिवस के अवसर पर जन जागरण शक्ति संगठन के बैनर तले एक विशाल मजदूर रैली का आयोजन किया . इस रैली में प्रखण्ड के दस पंचायत के नरेगा मजदूर शामिल हुए। यह रैली देहद मध्य विद्यालय से शुरू होकर सोनबरसा राज प्रखण्ड प्रांगण स्थित मनरेगा भवन पर इकट्ठा हुआ.
आज ही के दिन 2006 में दुनिया का सब से बड़ा रोजगार गारंटी कानून यानी मनरेगा जो भारत के हर ग्रामीण घर को सालाना 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी देता है, देश भर में लागू हुआ था। तब से देश के हजारों लाखों मजदूरों का सहारा है यह कानून। इसलिए हर साल की तरह इस साल भी जन जागरण शक्ति संगठन के मजदूर इस दिन को याद कर अपने अधिकारों की बात करने सड़कों पर उतर पड़े हैं। जात धर्म की बात छोड़ो, हर मजदूर से रिश्ता जोड़ों का नारा लेते हुए ब्लॉक पहुंची और कार्यक्रम पदाधिकारी को माँगपत्र सौंपा गया।
डॉक्टर बाबासाहब अंबेडकर को याद कर के कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
संगठन के शिवनारायण यादव ने गीतों से सभा को लुभाकर रखा. उन्होंने कहा, “आज के दौर में जहां बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी, पलायन और नफरत का माहौल है, मनरेगा जैसे मजदूर अधिकार कानून को सशक्त करना और इस में भ्रष्टाचार मिटाना हर नागरिक, जन संगठन, प्रशासन एवं सरकारों का कर्तव्य होना चाहिए।“
युवा कार्यकर्ता अखिलेश कुमार ने कहा, “मस्टर रोल हटा कर मोबाईल से हाजिरी हो रहा है। यह नरेगा कानून के खिलाफ है. इस में पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही खत्म होती है। आधार आधारित पेमेंट के चलते लाखों कार्यरत मजदूरों का जॉब कार्ड रद्द कर दिया गया है, कई घरों में चूल्हा जलना बंद हो गया है। इस से भ्रस्टाचार तो खत्म नहीं हुआ पर मज़दूर परेशान और हताश होता जा रहा है। यह सब लाए गए नए नियम तुरंत रद्द होने चाहिए.”
झिटकिया की सालो देवी ने बताया, “ग्रामीण रोज़गार गारंटी के साथ शहरी रोजगार गारंटी भी ज़रूरी है. नरेगा में दिए गए सभी नियमों का पालन होना चाहिए जैसे कार्यस्थल पर बोर्ड, मजदूरों के लिए दवापानी, छाँव, काम मांगने पर प्राप्ति, भुक्तान समय से न होने पर बेरोजगारी भत्ता इत्यादि। नरेगा में मज़दूरी भी बढ़नी चाहिए। मशीन और ठेकेदार वाला काम रुकना चाहिए.”
जन जागरण शक्ति संगठन के नेता, घोलट सादा ने कहा कि महिलाओं को और दलित-पिछड़े समाजों को आगे आकर, शिक्षित होकर, संविधान के दिखाए रास्ते पे चल कर अपने अधिकारों को लेना होगा।
अररिया से आई संगठन की मांडवी देवी ने कहा कि अगर नरेगा का लड़ाई मजदूरों की लड़ाई है. कुछ ताकतें है जो हमें धर्म-जाति के नाम पर उलझा रहें है. उसमें फँसना नहीं है. उस दल-दल से निकल कर मज़दूर को एकजुट होकर रोजी रोटी और इज़्ज़तदार ज़िंदगी के लिए लड़ना होगा, मज़दूर पक्षीय सरकार बिठाना होगा।
संगठन की शोहिनी ने ध्यान दिलाया कि पिछले कुछ सालों से नरेगा, शिक्षा, स्वास्थय, पेंशन, सभी के बजट में कटौती हुई है। वित्त वर्ष 22-23 में, नरेगा में नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम, आधार-आधारित भुगतान प्रणाली और अपर्याप्त बजटीय आवंटन के तीव्र हमले का सामना करना पड़ा है। तब से अभी तक देश भर में 7.6 करोड़ से अधिक जॉबकार्ड हटा दिए गए हैं और हमने जॉबकार्ड हटाए जाने में 273% की वृद्धि देखी है। चालू वर्ष के लिए लंबित पैसा 11,000 करोड़ से अधिक हैं और बजटीय आवंटन का लगभग 20% पिछले वर्ष के बकाया को चुकाने में चला गया है। इसके कारण विलंबित भुगतान और मांग में व्यवस्थित दमन का दुष्चक्र शुरू हो जाता है जो तत्काल रुकना चाहिए।
सभा में शामिल लोगों ने ठाना की आने वाले चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों से अपने घोषणापत्र में नरेगा को मज़बूत करने और शहरी रोजगार गारंटी अधिनियम को शामिल करने की अपील करेंगे।
कार्यक्रम में अरुल्या देवी, उमेश प्रसाद भगत, बिजली देवी, घोलट सादा, रेखा देवी, गोविंद, गौतम, मनोज राम, हरदेव पासवान, सुमित्रा देवी सहित कई मजदूर शामिल हुए।