पिता के कर्म नहीं करनें पर, समाजिक लोगों नें किया बहिष्कार

पिता के कर्म नहीं करनें पर, समाजिक लोगों नें किया बहिष्कार 

सौरबाजार/सहरसा- प्रखंड क्षेत्र के चन्दौर पश्चिमी पंचायत स्थित खोखसहा भगवानपुर भगत टोला में एक तरफ पुत्र अपने पिता के निधन पर श्रद्धांजलि मना रही है तो दूसरी तरफ स्थानीय लोगों ने पिता के कर्मकांड नहीं करने पर किया बहिष्कार। जानकारी अनुसार एक सप्ताह पूर्व अधिवक्ता अजय कुमार भगत के पिता नित्यानंद भगत की निधन हो  गया था। जिसको लेकर मंगलवार को उनके आवास पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। जिसमें पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना, जदयू नेता अमर यादव, पूर्व जिला पार्षद ओमप्रकाश नारायण यादव, सेवानिवृत शिक्षक कमलेश्वरी प्रसाद यादव, अधिवक्ता उमेश प्रसाद यादव, राहुल रोशन समेत अन्य लोग उपस्थित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने अजय भगत और उनके परिवार के इस निर्णय का समर्थन भी किया कि वह मृत्यु भोज नहीं करेंगे हालांकि इसको लेकर समाज के लोगों में रोष भी है इंजीनियर हरीश मंडल जो कर्मकांड और पाखंड के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं उन्होंने मृत्यु भोज का विरोध करते हुए कहा कि जिस घर में मौत होती है उस घर में अन्न जल ग्रहण नहीं करना चाहिए शास्त्रों के मुताबिक। मृत्यु भोज एक अभिशाप है। यह समाज की वह कुप्रथा है। जिसकी वजह से एक तो परिवार को दुख पड़ता है किसी की मृत्यु हुई है उसे दुख की घड़ी में लोग मृत्यु भोज खाने जाते हैं। इस अंधविश्वासी प्रथा को इतना समाज में फैला दिया गया है कि चाहे गरीब हो या अमीर हो हर इंसान को मृत्यु भोज करना होता है। यह एक सामाजिक बुराई है जिसके लिए सरकार ने एक कानून भी बनाया है। मृत्यु भोज अधिनियम 1960 जो राजस्थान सरकार ने लागू किया है। वहीं दूसरी तरफ भगवती स्थान परिसर में स्थानीय पवन भगत, गोसाई भगत, सुरेंद्र यादव, लाल चंद्र कुमार, सागर भगत समेत दर्जनों गण मान्य लोगों ने कर्मकांड नहीं करने को लेकर एक बैठक आयोजित कर बहिष्कार करते हुए कहा कि एक सप्ताह पूर्व समाजसेवी नित्यानंद भगत की मृत्यु हुआ था। उनके परिजनों द्वारा कर्मकांड नहीं किया गया। जिसको लेकर अग्नि संस्कार कर मृत्यु भोज एवं कर्मकांड का बहिष्कार किया हुं। साथ ही समाज से भी उन्हें बहिष्कार किया गया है। किसी भी फेनसन में उसे आमंत्रित नहीं किया जाएगा क्योंकि उन्होंने अपने पिता के कर्मकांड नहीं किया है। जबकि समाज के लोगों ने मृत्यु भोज की मांग नहीं करते हुए कर्मकांड करने की मांग की हैं स्वर्गीय  नित्यानंद भगत समाज से जुड़े व्यक्ति और नेक दिल इंसान थे। क्योंकि हम सभी समाज के लोग उनके विचारों पर चलने का काम करते थे।