आज भी हिन्दुस्तान की सोनबरसा राज प्रखण्ड क्षेत्र की जनता गुलामी में गुजरबसर करती है

सोनबरसा राज (सहरसा) (आससे) । जहाँ एक ओर बिहार सरकार के द्वारा जनता दरबार व जनसंवाद कार्यक्रम चलाई जा रही है वहीं बिहार के सहरसा जिला अन्तर्गत सोनबरसा राज प्रखण्ड क्षेत्र में प्रशासन हो या सत्तरुढ़ जनप्रतिनिधियों भ्रष्टाचार के गंगोत्री में जितना डूबे हुए हैं शायद ही ऐसी व्यवस्था और किसी प्रखण्ड में मिलती होगी। आश्चर्य कि बात तो यह है कि जनता द्वारा जिला और राज्य के वरिष्ठ पदाधिकारियों और बिहार सरकार के विभिन्न मंत्री को भी आवेदन पत्र देने पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। फलस्वरूप जनता थक हार कर बैठ जाती है। वहीं ठीकेदर व सत्ता रुढ़ जनप्रतिनिधियों ताना मार कर जनता को मुंह चिढ़ाते कहते हैं कि आवेदन पत्र देकर ही क्या कर लिया। 

मालूम हो कि सोनबरसा राज प्रखण्ड क्षेत्र हो या फिर नगर पंचायत सोनबरसा , विकास की जितना भी कार्य हुई है सभी में बड़े पैमाने पर अनियमितता देखने के लिए पहली ही दृश्यता में नजर आ जाती है। चाहे वह जल निकासी नाला का निर्माण हो या फिर सड़क व भवन निर्माण का कार्य हो, मनरेगा योजना की बात तो ही छोड़ दिजिए वहाँ तो लूट ही लूट है।ऐसी ही स्थिति जनवितरण प्रणाली दूकान की है। भुमि विवाद की मामला तो और निराली है, आपको कागज हो या नहीं हो अंचल कर्मी रिश्वत पर बिना कागज का जमीन दे देते हैं और सर्वे विभाग तो बिना रजिस्ट्री का जमीन देते हैं। जैसा कि हजारों मामला चल रही है।

जनता द्वारा दिया गया आवेदन पत्र पर यदि सही रुप से जांच हो तो शायद ही कोई भी योजना ऐसा होगी जहाँ अनियमितता देखने को नहीं मिल पाती हो लेकिन आवेदन पत्र पर यदि जांच भी होती है तो जांच पदाधिकारियों द्वारा ठिकेदारों के पक्ष में ही जांच रिपोर्ट दे देते हैं। फलस्वरूप भ्रष्टाचार को स्वत: संरक्षण मिल जाती है।

सोनबरसा राज प्रखण्ड क्षेत्र में जल निकासी योजना, सड़क निर्माण योजना, भवन निर्माण योजना, बिहार सरकार पंचायत भवन निर्माण योजना, हर घर नल जल योजना, ऐसे दर्जनों योजनाओं में ठिकेदारों द्वारा खुले आम अनियमितता बर्ती जा रही है। वहीं प्रशासन हाथ पर हाथ रख तमाशा देख रही है।

ज्ञात हो कि कोई भी जनता यदि अनियमितता की बात या पदाधिकारियों को इस सम्बन्ध में आवेदन पत्र देते हैं तो ठिकेदारों सहित पदाधिकारियों के द्वारा उसे देख लेने की धमकी तक दे दिया जाता है। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि आज भी हिन्दुस्तान की यह सोनबरसा राज प्रखण्ड की जनता आजद नहीं बल्कि धनवानों और प्रशासनिक पदाधिकारियों सहित ठिकेदारों का गुलामी में गुजरबसर करती है।