सोनबरसा राज (सहरसा) (आससे) । सोनबरसा राज न्यू बस पड़ाव के यात्री शेड में मिड डे मील रसोईया संयुक्त संघर्ष समिति बिहार के आह्वान पर एक बैठक रसोईया संघ के प्रखण्ड संयोजक सह सीपीएम अंचल मंत्री सोनबरसा राज के गुरुदेव शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।
बैठक में केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा रसोईया के साथ लगातार भेदभाव, उपेक्षा एवं नाइंसाफी के खिलाफ 11 सुत्री मांगों की प्राप्ति के लिए मिड डे मील रसोईया संयुक्त संघर्ष समिति बिहार के आह्वान पर दिन 31 अक्टूबर 2023 रोज मंगलवार को 12 बजे दिन में मुख्यमंत्री के समक्ष रोषपूर्ण प्रदर्शन में हजारों की संख्या में भाग लेकर सफल बनाने हेतु बिस्तर से चर्चा हुई।
मालुम हो कि रसोईया संघ के सोनबरसा राज प्रखण्ड संयोजक सह सीपीएम अंचल मंत्री गुरुदेव शर्मा ने कहा कि बिहार के स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत काम करने वाली करीब 2.5 (अढ़ाई लाख) एम डी एम रसोईया केन्द्र एव्ं राज्य सरकार की लगातार उपेक्षा एवं भेदभाव की शिकार है और बेहद अपमानजनक स्थिति में सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरी ईमानदारी से सरजमीन पर लागू कर रही है। विद्यालय खोलने से लेकर बंद होने तक स्कूलों में काम करनेवाली रसोईया को प्रतिमाह 1650 रुपये मानदेय के रूप में मिलता है, वह भी साल में 10 महीने में जो सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मजदूरी से भी काफी कम और अपमानजनक है। रसोईया को किसी तरह का समाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं है। 60 वर्ष की उम्र पूरा होने पर पेंशन या किसी तरह की सहयोग राशि दिये बगैर उन्हें दुध की मक्खी की तरह निकालकर बाहर कर दिया जाता है। दूर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व अवकाश, भविष्यनिधि जैसे न्यनतम समाजिक सुरक्षा की गारंटी से भी रसोईया पूरी तरह वंचित है। उपर से शिक्षा विभाग द्वारा रोज व रोज नया नया फरमान जारी कर रसोईया के काम के बोझ को बढ़ाया जा रहा है। कई विद्यालयों में उन्हें खाना बनाने, बच्चों को खिलाने के निर्धारित काम के अतिरिक्त स्कूलों की सफाई, शौचालय की सफाई तक का काम लिया जाता है और अतिरिक्त काम नहीं करने पर कार्य से हटा देने की धमकी दी जाती है।
वहीं सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश को दरकिनार कर स्कूलों में बने ताजा एवं पौष्टिक भोजन देने के बजाय केन्द्रीयकृत घरों में बने बासी एवं गैरमानक खाना को एन जी ओ के माध्यम से आपूर्ति करने का आदेश निर्गत कर न केवल राज्य के कड़ोड़ों स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है बल्कि रसोईया को भी एन जी ओ के हवाले करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। जिसे राज्य की रसोईया कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।
मिड डे मील वर्कर्स (रसोईया) यूनियन तथा अन्य रसोईया संगठनों ने लगातार सरकार को रसोईया के मांगों एवं समस्या से अवगत कराया है और समाधान की मांग की है। लेकिन सरकार रसोईया के समस्या समाधान एवं न्यायोचित मांगों के प्रति संवेदनहीन बनी हुई है।
ज्ञात हो कि रसोईया संघ की 11 मुख्य मांगों में (1) एम डी एम रसोईया को सरकारी कर्मी घोषित कर न्यूनतम मानदेय की गारंटी की जाए। (2) रसोईया का तत्काल प्रतिमाह 10,000 रुपये मानदेय सुनिश्चित किया जाए। (3) साल में 10 महीने के बजाय 12 महीने के मानदेय का भुगतान किया जाए। मानदेय का भुगतान हर महीने के प्रथम सप्ताह में हो। (4) रसोईया के सेवानिवृत्त होने पर समाजिक सुरक्षा के तहत 3000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दिया जाए। (5) रसोईया से अतिरिक्त काम जैसे- स्कूल में झाड़ू लगाने, शौचालय की सफाई आदि काम कराने पर रोक लगाया जाए तथा अकारण हटाये गए रसोईया को काम पर वापस लिया जाए। (6) रसोईया को साल में एक जोड़ा सुती ड्रेस मुहैया कराया जाए। (7) रसोईया को दूर्घटना बीमा व स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाए। (8) रसोईया को सवैतनिक मातृत्व एवं विशेष अवकाश का लाभ दिया जाए। (9) विद्यार्थियों के अनुपात में रिक्त पदों पर रसोईया का शीघ्र बहाली किया जाए। बहाली में मृत एवं रिटायर रसोईया के परिवार को प्राथमिकता दिया जाए। (10) सभी रसोईया को शिक्षा विभाग की ओर से परिचय पत्र, चयन पत्र निर्गत किया जाए। (11) मध्याह्न भोजन योजना में केन्द्रीयकृत किचेन को बंद कर एन जी ओ एवं ठेकेदारों को मध्याह्न भोजन योजना से बाहर किया जाए।